सीएम सिद्धारमैया
कर्नाटक को देश के समृद्ध राज्यों में शुमार किया जाता है. लेकिन मुख्यमंत्री के एक सवाल के बाद कर्नाटक में इस पर सवाल उठने लगे हैं. कर्नाटक के 80 फीसदी नागरिक गरीबी रेखा से नीचे कैसे हैं? यह सवाल सीएम सिद्धारमैया ने तब पूछा जब उन्होंने हाल ही में राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक की. सीएम सिद्धारमैया ने राज्य में फर्जी बीपीएल कार्डों की तेजी से बढ़ती संख्या पर चिंता जताई और अधिकारियों से यह सवाल पूछकर अपनी नाराजगी व्यक्त की. साथ ही उन्होंने अपने अफसरों को राज्य में फर्जी बीपीएल कार्डों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया.
तमिलनाडु में बीपीएल (Below Poverty Line, BPL) कार्ड धारकों की संख्या 40 फीसदी होने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि नीति आयोग के अनुसार, कर्नाटक में महज 5.67 फीसदी नागरिक ही गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) होने चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि 1.47 करोड़ परिवारों में से 4.67 करोड़ लोगों के पास बीपीएल कार्ड हैं.
अभी भी 3 लाख आवेदन लंबित
सिद्धारमैया अधिकारियों को तल्ख लहजे में आदेश दिया कि असली गरीबों को नए बीपीएल कार्ड देने के साथ ही सभी फर्जी कार्ड हटा दिए जाएं. राज्य में 4.67 करोड़ लोगों को बीपीएल कार्ड मिल रहे हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत परिवार यानी 1.27 करोड़ बीपीएल होने का दावा कर रहे हैं. फिर भी, बीपीएल कार्ड के लिए नए 2.95 लाख आवेदन लंबित हैं.
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सीएम ने कहा, “नीति आयोग के अनुसार, हालांकि राज्य में गरीब लोगों की संख्या में कमी आई है, लेकिन बीपीएल कार्ड की संख्या में कमी नहीं आने का क्या कारण है? तमिलनाडु में यह 40 फीसदी है. इस संबंध में समीक्षा की जानी चाहिए और जो लोग पात्र नहीं हैं उन्हें हटाने को लेकर कार्रवाई की जानी चाहिए. इसी तरह, मृतक सदस्यों के नाम हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए.”
6 लाख से अधिक फर्जी कार्ड हटाए गए
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मुताबिक, राज्य में 2.95 लाख नए राशन कार्ड (बीपीएल) के आवेदन लंबित हैं. दिसंबर 2021 और फरवरी 2024 के बीच, अधिकारियों ने 6.17 लाख फर्जी बीपीएल कार्डों का पता लगाया और उन्हें हटा दिया.
सीएम सिद्धारमैया, खुद राज्य के वित्त मंत्री भी हैं. सरकार की अन्न भाग्य योजना और गृह लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों की पहचान करने का यही मुख्य आधार है. सरकार की 5 मुफ्त गारंटी योजनाओं में से इन 2 योजनाओं की लागत 28,000 करोड़ रुपये से अधिक है.
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में करीब 76 लाख पेंशनभोगी हैं. उन्होंने निर्देश दिया कि अधिकारी मृत्यु की स्थिति में पेंशनभोगी के नाम पर किए जा रहे भुगतान को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाएं.
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