
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गज महोत्सव
मध्य प्रदेश का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व वैसे तो बाघों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इन दिनों यहां हाथी महोत्सव चल रहा है. 7 दिन चलने वाले इस महोत्सव में हाथियों से कोई काम नहीं लिया जा रहा. बल्कि सुबह सुबह नहलाने धुलाने के बाद तेल मालिस कर चंदन का लेप लगाया जा रहा और सिंदूर का टीका किया जा रहा है. इसी प्रकार खाने में उन्हें मन पसंद भोजन दिया जा रहा है. इसमें मन पसंद फलों के अलावा नारियल, गुड़, गन्ना और केला-सेब के साथ शहद लगाकर रोटी खिलाई जा रही है.
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के मुताबिक ये हाथी सालो साल काम करते हैं, लेकिन इन सात दिनों के लिए उन्हें बिल्कुल छुट्टी दे दी गई. ऐसे में उनके पास फिलहाल एक ही काम है कि खाओ पीओ और मौज करो. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हर साल हाथी महोत्सव मनाया जाता है. इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक और क्षेत्रीय लोग भी यहां आते हैं और हाथियों के साथ तस्वीरें खींचाते हैं. हालांकि इस बार कोई बाहरी आदमी यहां नजरनहीं आ रहा. दरअसल पार्क प्रबंधन ने आम लोगों को इस बार गज महोत्सव से दूर रखा है.
सभी हाथियों का बना है बॉयोडाटा
प्रबंधन के मुताबिक फिलहाल यहां 15 हाथी हैं. इन सभी हाथियों का बॉयोडाटा भी है. इनमें 1946 में पैदा हुआ नर हाथी गौतम 77 वर्ष का हो गया है. इसे नौ मार्च 1978 को कान्हा टाइगर रिजर्व से यहां लाया गया था. इसी प्रकार 1964 में पैदा हुई मादा हाथी अनारकली अब 60 साल की हो चुकी है. यह भी साल 1978-79 में सोनपुर मेले से यहां लाई गई थी. इसी प्रकार 41 साल के श्याम नर को साल 2018 में जंगल से पकड़ कर पालतू बनाया गया था. वहीं 1986 में पैदा हुए रामा भी जंगली है और इसे 7 अप्रैल 2011 को अनूपपुर के जंगल से रेस्क्यू कर बांधवगढ़ लाया गया था.
हाथियों को मिल रही है मनपसंद डाइट
जबकि सुंदरगज का जनम 11 जून 1987को बांधवगढ़ में ही हुआ. लक्ष्मण हाथी 1997 में पैदा हुआ था और इसे मई 2017 में सीधी के जंगल से पकड़ कर बांधवगढ़ लाया गया. जबकि नर हाथी अष्टम का जन्म 13 अक्टूबर 2002 को बांधवगढ़ में ही हुआ. वहीं बांधवीय मादा भी 30 नवंबर 2011 को यहीं पैदा हुई. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा ने बताया कि 7 दिवसीय हाथी महोत्सव मनाया जा रहाहै. इसमें टाइगर रिजर्व के अंदर सभी पालतू हाथियों को एक साथ रखा जा रहा है और इनकी पूरी सेवा हो रही है. इनकी रेग्युलर डाइट विशेषज्ञों के द्वारा सुझाई गई है और इसी डाइट के मुताबिक ही उन्हें भोजन दिया जा रहा है.
रिपोर्ट: सुरेन्द्र त्रिपाठी, उमरिया (MP)
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