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कभी सूर्य ग्रहण भारत में दिखता है कभी नहीं, ऐसा क्यों होता है? | total solar eclipse april 8 2024 why are solar eclipse not seen from everywhere on earth at once explained

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Apr 8, 2024    150834 views     Online Now 298
कभी सूर्य ग्रहण भारत में दिखता है कभी नहीं, ऐसा क्यों होता है?

इस बार का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.Image Credit source: Pixabay

साल का पहला सूर्य ग्रहण सोमवार 8 अप्रैल को होगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जो एक दुर्लभ खगोलीय घटना है. इसे लेकर काफी लोगों में उत्साह है. हालांकि, यह ग्रहण कुछ देशों में ही दिखाई देगा. इनमें अमेरिका, कनाड़ा, इंग्लैंड, मैक्सिको शामिल हैं. भारत और उसके पड़ोसी देश के लोग इस नजारे को नहीं देख पाएंगे. ऐसे में आपके मन में भी सवाल आया होगा कि आखिर इस बार भारत में ग्रहण क्यों नहीं दिख रहा है? क्यों कुछ देश ही ग्रहण के गवाह बन पाते हैं?

8 अप्रैल को होने वाला ग्रहण किसी आम सूर्य ग्रहण से अलग है. जब सूरज और पृथ्वी के बीच चांद आ जाता है, तो उसे सूर्य ग्रहण कहते हैं. लेकिन पूर्ण सूर्य ग्रहण में सूरज, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं. चांद पूरी तरह से सूरज को ढक देता है और दिन के समय अंधेरा-सा छा जाता है. पूर्ण सूर्य ग्रहण हर डेढ़ साल में पृथ्वी पर कहीं न कहीं होता है. अमेरिका में इससे पहले 2017 में ऐसा ग्रहण देखा गया था.

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क्यों कुछ देशों में दिखता है सूर्य ग्रहण?

जब पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है तो आसमान में लगभग उतना ही अंधेरा हो जाता है जितना सूर्योदय से लगभग 20 से 40 मिनट पहले या सूर्यास्त के 20 से 40 मिनट बाद होता है. इस दौरान दूर के ग्रह जैसे वीनस और सूरज के पास मौजूद चमकीले तारे भी धरती से नजर आते हैं. लेकिन पूरी दुनिया के लोग इसका अनुभव एक साथ नहीं कर सकते हैं. पूर्ण सूर्य ग्रहण को देख पाना बहुत दुर्लभ होता है. चंद्र ग्रहण की तुलना में सूर्य ग्रहण को देख पाने की संभावना बहुत कम होती है. औसतन, पृथ्वी पर एक ही स्थान को लगभग हर 375 सालों में केवल कुछ मिनटों के लिए सूर्य ग्रहण देखने को मिलता है.

अब समझते हैं कि यह कुछ देशों में ही क्यों दिखता है? चांद, पृथ्वी और सूरज सब अपने-अपने एक्सिस पर हर वक्त चक्कर लगाते रहते हैं. लेकिन हमेशा, पृथ्वी और सूरज के बीच में चांद नहीं आता है. नासा की रिपोर्ट के मुताबिक, पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा का ऑर्बिट सूर्य के चारों ओर पृथ्वी के ऑर्बिट की तुलना में झुका हुआ है. आसान भाषा में समझें तो चांद 5 डिग्री के एंगल पर पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है.

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ऐसा बहुत कम बार होता है जब सूरज, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाएं. ऐसा तभी होता है जब चंद्रमा और सूरज पृथ्वी के एक ही तरफ होते हैं (दूसरे शब्दों में, जब चंद्रमा दिन के आसमान होता है). चूंकि पृथ्वी गोल आकार की है, इसलिए यह नजारा केवल उसी भाग के देशों में दिखता है, जहां उस समय दिन हुआ होता है. इसी वजह से इस साल भारत में सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई दे रहा है. खास बात यह भी है कि सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या के दौरान होता है.

क्यों अमेरिका के भी कुछ ही हिस्सों में दिखेगा ग्रहण?

पूर्ण सूर्य ग्रहण में चांद धीरे-धीरे सूरज और धरती के बीच में आता है. पहले फेज में आंशिक सूर्य ग्रहण होता है, जिसमें सूरज आधे चांद के आकार का दिखता है. चांद जब सूरज को पूरी तरह ढक लेता है तो टोटेलिटी का दौर शुरू होता है. टोटेलिटी में धरती से सूरज का कोरोना (सूरज के वायुमंडल का का बाहरी हिस्सा) भी नजर आता है, जो आम दिनों में सूरज की चौंध में दिख नहीं पाता. यह टोटेलिटी काफी खास होता है. लेकिन इसे देख पाना और भी दुर्लभ होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि सूरज की तुलना में चांद बहुत छोटा होता है और इसी वजह से पृथ्वी पर बनने वाली उसकी परछाई का क्षेत्र भी बहुत छोटा होता है. परछाई में पड़ने वाले इलाकों में ही टोटेलिटी और सूर्य ग्रहण दिखता है.

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