
दीघा में जगन्नाथ मंदिर, राम और ममता बनर्जी.
पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव है. विधानसभा चुनाव से पहले रविवार को रामनवमी को लेकर राज्य की सियासत गर्म है. भारतीय जनता पार्टी और हिंदू संगठन विश्व हिंदू परिषद ने कोलकाता सहित विभिन्न जिलों में रामनवमी जुलूस निकालने का ऐलान किया है. पिछले कई सालों में हुई हिंसा के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गये हैं. कोलकाता में चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है. ममता बनर्जी की सरकार ने पुलिस से सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने का निर्णय किया है, तो बीजेपी के रामनवमी का मुकाबला राजनीतिक रूप से जगन्नाथ मंदिर से करने की योजना बनाई है.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी लगातार हिंदुओं को एकजुट करने की कोशिश कर रही है और ममता बनर्जी पर अल्पसंख्यकों की तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है, लेकिन ममता बनर्जी ने बीजेपी के हिंदुत्व का मुकाबला सॉफ्ट हिंदुत्व की नीति से करती रही हैं.
पिछले विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी पर बाहरी होने का आरोप लगाया था और बंगाल की संस्कृति की अवेहलना करने का आरोप लगाया था और ममता बनर्जी ने 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त दी थी.
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अक्षय तृतीया पर जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दीघा में पुरी के जगन्नाथ मंदिर के तर्ज पर मंदिर बनाया जा रहा है. अप्रैल माह के अंत में अक्षय तृतीया के अवसर पर ममता बनर्जी इस मंदिर का उद्घाटन करेंगी. दीघा में जगन्नाथ धाम का उद्घाटन रामनवमी के जवाब में हिंदुत्व प्रदर्शित करने का ‘मंच’ बनने जा रहा है.
पिछले कुछ महीनों से शुभेंदु अधिकारी समेत भाजपा नेता जो कुछ कह रहे हैं, उससे एक बात स्पष्ट है – भाजपा सभी हिंदू वोटों को एकजुट करना चाहती है. शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि तृणमूल दरअसल ‘बंगाली-अबंगाली’ बनाकर हिंदुओं में विभाजन पैदा करना चाहती है.
जहां भाजपा हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कर उसे अपने पक्ष में करने के लिए बेताब है, वहीं, तृणमूल कांग्रेस भी बंगाली की आड़ में हिंदुत्व को पेश करने की कोशिश कर रही है.
बंगाल में राम बनाम जगन्नाथ, सियासी घमासान
राजनीतिक हलकों में कई लोग जगन्नाथ धाम के उद्घाटन को दूसरे नजरिए से देख रहे हैं. उनके अनुसार, जो व्यक्ति वर्तमान में बंगाल में उग्र हिंदुत्व की आड़ में भाजपा की राजनीति कर रहे हैं, वह विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी हैं. पूर्व मेदिनीपुर शुभेंदु अधिकारी का गृह जिला है. ममता उसी पूर्व मेदिनीपुर में जगन्नाथ धाम का उद्घाटन करेंगी और वह इस तरह से शुभेंदु अधिकारी पर भी दवाब बनाने की कोशिश करेंगी.
मुख्यमंत्री ने पिछले दिसंबर में कार्य का निरीक्षण करने के लिए दीघा स्थित जगन्नाथ धाम का दौरा किया था. इस यात्रा में मुख्यमंत्री के साथ इस्कॉन कोलकाता के प्रमुख राधारमण दास भी थे. उस समय, इस्कॉन भिक्षु चिन्मयकृष्ण दास की गिरफ्तारी को लेकर बांग्लादेश में अशांति थी. शुभेंदु अधिकारी भी सड़कों पर उतरे और जुलूस निकाला था, लेकिन कोलकाता इस्कॉन के प्रतिनिधि ममता के साथ दीघा गए थे. इसे लेकर बंगाल में जमकर राजनीति हुई थी. ममता बनर्जी हर साल रथयात्रा पर इस्कॉन के रथ का उद्घाटन करती रही हैं.
बीजेपी से मुकाबले के लिए ममता का सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड
ममता बनर्जी ने राज्य में कई मंदिरों के सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार का भी दावा करती रही हैं. इनमें दक्षिणेश्वर का मंदिर शामिल है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी रामनवमी का मुकाबला जगन्नाथ मंदिर से करने की योजना बना रही है. उनका कहना है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि श्री रामचंद्र की तुलना में जगन्नाथ देव बंगालियों के जीवन के ज्यादा करीब हैं. इसका इतिहास भी बहुत पुराना है. किसी भी बंगाली के लिए रथ यात्रा का मतलब जगन्नाथ-बलराम-सुभद्रा है.
भाजपा जिस हिंदू संस्कृति में विश्वास करती है, वह बंगाली हिंदुओं के साथ मेल नहीं खाती है और ममता बनर्जी बंगालियों के इसी भावना पर सियासी खेल खेलती रही हैं और बीजेपी के हिंदुत्व के मुकाबले ममता बनर्जी सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड चलती रही हैं.
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