जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद मदनी
जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद मदनी ने कहा कि बुलडोजर एक्शन की इजाजत नहीं है. बुलडोजर आज के दौर में अन्याय और अत्याचार का प्रतीक बन गया है. जो कोई अगर गलत काम करता है उसे माफी नहीं मिलनी चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में कहीं भी कोई खतरा नहीं है.
टीवी 9 भारतवर्ष के खास कार्यक्रम 5 एडिटर्स के साथ बातचीत में कई दलों के साथ जुड़ने को लेकर जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख महमूद मदनी ने कहा कि गलत को गलत, सही को सही कहता हूं. कुछ की कुछ बातें बहुत खराब लगती हैं. कुछ की कुछ बातें बहुत अच्छी लगती हैं.
देश में खतरे में कोई चीज नहीं है. खतरे का जो झुनझुना है उसे लोगों को हटा दिया जाना चाहिए. जिसे खतरा लगता है कि वो खतरा बता देना है. फायदे के लिए लोग एक-दूसरे को खतरा बता दिया जाता है.
बुल्डोजर को लेकर महमूद मदनी ने कहा कि सभ्य समाज में बुलडोजर एक्शन की इजाजत नहीं है. मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकते. सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि बुलडोजर एक्शन सही है या गलत. बुलडोजर अन्याय और अत्याचार का प्रतीक बन गया है. उन्होंने आगे कहा कि जो गलत करता है उसे माफी नहीं मिलनी चाहिए.
पूर्व राज्यसभा सांसद और इस्लामी विद्वान महमूद मदनी ने वक्फ से जुड़े सवाल पर कहा कि अगर मामला मुसलमानों से जुड़ा है. तो उनसे बात की जानी चाहिए. मुसलमानों से बात किए बिना वक्फ संशोधन किया जा रहा है.
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