
आईटी सेक्टर के लिए बदले नियमImage Credit source: Unsplash
क्या आप आईटी इंजीनियर हैं या आपका कोई जानने वाला आईटी इंजीनियर है? अगर हां, तो अब इस एक राज्य में उनके काम के घंटे बढ़ा दिए गए हैं. इसके लिए प्रदेश सरकार ने श्रम कानून से जुड़े नियमों में बदलाव भी कर दिए हैं. हालांकि अभी इसके लिए आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है. फिर भी ये बदले हुए नियम 1 जुलाई से लागू होने की उम्मीद की जा रही है.
दरअसल आईटी इंजीनियर्स के काम करने के घंटों में ये बदलाव पश्चिम बंगाल में हुआ है. यहां राज्य सरकार ने आईटी इंजीनियर्स के रोजाना के कामकाजी घंटों को एक जुलाई से 30 मिनट यानी आधे घंटे के लिए बढ़ा दिया है. अब आईटी इंजीनियर्स को ऑफिस में पहले से ज्यादा टाइम स्पेंड करना होगा.
क्या पड़ेगा वर्क-लाइफ बैलेंस पर असर?
राज्य सरकार के कामकाजी घंटे बढ़ाने से क्या उनकी वर्क-लाइफ बैलेंस पर असर पड़ेगा? तो ऐसा नहीं होने जा हा है, क्योंकि आईटी इंजीनियर्स के लिए काम के साप्ताहिक घंटे पहले की तरह ही रहेंगे. उन्हें एक हफ्ते में मैक्सिमम 48 घंटे ही काम करना होगा. सरकार जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सकती है.
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आईटी इंडस्ट्री की लंबे समय से थी मांग
इस बारे में राज्य के आईटी उद्योग मंत्री बाबुल सुप्रियो का कहना है कि आईटी इंडस्ट्री लंबे समय से इसकी मांग कर रही थी. प्रदेश सरकार ने अब उनकी मांग को पूरा करने का काम किया है. बाबुल सुप्रियो ने कहा कि अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा में तालमेल बनाए रखने और पश्चिम बंगाल में आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए ही ये फैसला किया गया है.
अब इतने घंटे की होगी ऑफिस शिफ्ट
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने आईटी इंजीनियर्स के लिए डेली ऑफिस टाइम की लिमिट को 8:30 घंटे से बढ़ाकर 9 घंटे करने को हरी झंडी दे दी है. ये फैसला आईटी इंडस्ट्री की पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए किया गया है. इसकी वजह ये है कि आमतौर पर आईटी कंपनी हफ्ते में 5 दिन के वर्किंग मॉडल पर काम करती हैं.
बाबुल सुप्रियो ने कहा कि ऐसे में अब से हफ्ते में कामकाजी घंटों की मैक्सिमम लिमिट 48 घंटे ही रहेगी. जबकि इस बदलाव से आईटी कंपनियां अपने क्लाइंट्स को 42.5 घंटे के बजाय 45 घंटे का बिल दे सकती हैं. इससे आईटी कंपनियों को बिल में हर दिन 2.5 घंटे का लाभ मिलेगा. उन्हें वित्तीय मदद मिलेगी और वे अन्य राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे. यह बदलाव 1 जुलाई से प्रभावी होगा.
पश्चिम बंगाल के श्रम विभाग के अनुसार कि वर्तमान में आईटी और नॉन-आईटी दोनों सेक्टर्स के लिए दैनिक कामकाजी समय सीमा 8.30 घंटे ही है.
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