
साइबर क्राइम.
भारत में साइबर अपराध के अपराध से निपटने के लिए भारतीय न्याय संहिता में सरकार तीन नई धाराएं लेकर आई, लेकिन न्यायपालिका की माने तो यह नाकाफी साबित हो रही हैं. सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी आपराधिक कानून के विशेषज्ञों पवन दुग्गल, ज्ञानंत सिंह और अनुपम मिश्रा की मानें तो बीएनएस की नई धाराएं इसलिए नाकाफी साबित हो रही हैं, क्योंकि पुलिस अभी तकनीकी तौर पर उतनी अपग्रेड नहीं है. जितनी तेजी से साइबर दुनिया में बदलाव होता है. ऐसे में किसी भी साइबर अपराध की ट्रेल को पकड़ना और इसके बाद उसे अदालत में साबित करना मुमकिन नहीं होता.
मान लीजिए कोई तमिलनाडु में बैठकर एक वेबसाइट चला रहा है, लेकिन तकनीकी तौर पर उसे बदलाव कर किसी और राज्य से दिखाया जा रहा है तो ऐसे में प्रथम सूचना के मिलते ही वास्तविक धोखेबाज तक पहुंचना मुमकिन नहीं होता. यही वजह है कि विभिन्न साइबर अपराध से निपटने को लेकर केरल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गहरी चिंता जताई है.
बढ़ते साइबर अपराध पर केंद्र से जवाब-तलब
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है. अदालत ने कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सर्विस (CANP) को लागू करने के लिए ट्राई (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) को निर्देश देने की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है. चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने इसे बड़ा मुद्दा माना है.
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केरल हाईकोर्ट ने क्या कहा…
केरल हाईकोर्ट ने साइबर बुलिंग-ऑनलाइन उत्पीड़न से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कानूनी प्रावधानों की अनुपस्थिति पर चिंता व्यक्त की. हाईकोर्ट ने कहा कि दूसरों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी, सामग्री या ऑनलाइन उत्पीड़न के रूप में साइबर बुलिंग को मौजूदा कानूनी ढांचे के माध्यम से अपर्याप्त रूप से संबोधित किया जा रहा है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा…
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में साइबर अपराधों की विवेचना में तमाम खामियों पर नाराजगी जताई. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी यूपी) से व्यक्तिगत हलफनामा मांग कर पूछा है कि प्रदेश की पुलिस साइबर अपराधों की जांच के लिए कितनी तैयार है?
क्या पुलिस को साइबर अपराधों की जांच के लिए प्रशिक्षित करने के लिए किसी विशेषज्ञ संस्था को जिम्मेदारी दी गई है या साइबर अपराधों की जांच में पुलिस आईटी विशेषज्ञों से सलाह लेती है? और यह सलाह किस प्रकार से ली जाती है? एक किशोरी की अश्लील तस्वीरें और वीडियो फेसबुक पर पोस्ट करके उसे बदनाम करने और ब्लैकमेल कर रकम ऐंठने के आरोपित साबू की जमानत अर्जी सुनवाई करते यह आदेश दिया था.
बीएनएस में साइबर क्राइम से संबंधित हैं ये धाराएं
बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) में साइबर क्राइम से संबंधित कई धाराएं हैं, जिनमें धारा 318, 336 और 365 शामिल हैं जो धोखाधड़ी, साइबर धमकी और ब्लैकमेल से संबंधित हैं.
धारा 318- यह धारा धोखाधड़ी से संबंधित है, जिसमें पासवर्ड चोरी, फर्जी वेबसाइट बनाना और साइबर धोखाधड़ी शामिल है.
धारा 336- यह धारा जालसाजी को संबोधित करती है, जिसमें किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का उद्देश्य शामिल है, चाहे वह भौतिक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से हो.
धारा 365- यह धारा साइबर धमकी और ब्लैकमेल को दंडित करती है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से धमकी देना, किसी व्यक्ति को डराना-धमकाना और ब्लैकमेल करना शामिल है.
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