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परंपरा और आधुनिकता का संगम बना राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया से गूंजा मंच – Achchhi Khabar, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar

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Nov 2, 2022    150811 views     Online Now 111

रायपुर. राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव (National Tribal Dance Festival) के दूसरे दिन देश-विदेश से आये कलाकारों के बीच लोक नृत्य की प्रतियोगिता उपरांत कार्यक्रम की समाप्ति हुई. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अलावा पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, आदिम जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम और हरियाणा के सहकारिता मंत्री सहित अनेक जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में उपस्थित थे.

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव (National Tribal Dance Festival) परंपरा और आधुनिकता का संगम बना. मुख्यमंत्री के दर्शक दीर्घा में आगमन के साथ ही छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया के नारों से कार्यक्रम स्थल गूंज उठा. इसी बीच मालदीव के कलाकारों द्वारा नृत्य प्रदर्शन के बाद हिंदी बॉलीबुड गाने ने सभी को आश्चर्य चकित कर दिया. इसके बाद बारी आई सर्बिया की. राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव (National Tribal Dance Festival) में करीब 4 हजार किलोमीटर दूर सर्बिया से आए 10 सदस्य कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य कौशल को देख दर्शक काफी उत्साहित हुए. सर्बिया के कलाकार ट्रेडिशनल डांस का प्रदर्शन किए. सर्बिया के कलाकारों ने प्यानो और शहनाई नुमा वाद्य यंत्रों से अलग-अलग धुनों में मधुर संगीत लहरियां प्रस्तुत कर दर्शकों का मनोरंजन किया. मधुर धुन की ताल पल पर महिला और पुरुष कलाकारों के थिरकते कदम आकर्षक दृश्य तो वहीं पुरुष फर का कैप लगाए एक हाथ में डंडा पकड़ कर नृत्य किए. इन कलाकारों ने ‘‘सबले बढ़िया छत्तीसगढ़िया’’ का उद्घोष कर मुख्यमंत्री सहित अतिथियों का अभिवादन किया.

न्यूजीलैंड के आदिवासी कलाकार अपनी पारम्परिक वेशभूषा में मंच पर पहुंचे. अपने विशिष्ट रीति रिवाज के अनुसार नृत्य की प्रस्तुति देने के पहले छत्तीसगढ़ को मित्र बनने की परंपरा को प्रतीक के रूप में निभाया. उन्होंने अपनी भाषा में छत्तीसगढ़ के साथ मित्रता की घोषणा की. न्यूजीलैंड के कलाकारों ने भी किया ‘‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’’ का नारा लगाकर छत्तीसगढ़वासियो और अतिथियों का अभिवादन किया. न्यूज़ीलैंड की टीम द्वारा हाका लोकपरम्परा में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि से मैत्री और छत्तीसगढ़ की भूमि वंदना की गई.

मंगोलिया के कलाकार अपनी पारंपरिक वेश भूषा में संगीत की तेज धुन पर ऊर्जा और उत्साह के साथ जोश से ओतप्रोत लयबद्ध नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों के बीच रोमांच जगाने में सफल रहे. गुलाबी ठंड में भी लोग डटे रहे. मंगोलियाई कलाकारों द्वारा शांति और समृद्धि का पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया गया.

इंडोनेशिया के कलाकारों ने के पारम्परिक नृत्य के प्रारम्भ में ही दर्शकों ने हर्ष ध्वनि कर उनका स्वागत किया. रंग बिरंगे परिधान, श्रृंगार के साथ उनकी नृत्य शैली बरबस ही दर्शकों को मुग्ध की. रंगबिरंगी रोशनी, चमकदार पोशाक में तेजी से बदलती संगीत की धुन पर आसान से स्टेप के साथ थिरकते कलाकारों के साथ दर्शक भी नृत्य संगीत का भरपूर आनंद लिए.

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