बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भारूचा की फिल्म Chhorii 2 का शानदार ट्रेलर सामने आ गया है. ये फिल्म काफी खास है. साल 2021 में आई फिल्म ‘छोरी’ भी नुसरत की फिल्म थी. ये फिल्म की शानदार थी. हालांकि, ये ओटीटी फिल्म थी, लेकिन हॉरर की दुनिया में छोरी ने काफी कुछ नया दिखाया था. फिल्म में नुसरत के अलावा लीड रोल में एक्ट्रेस सोहा अली खान भी हैं, जो नेगेटिव रोल निभा रही हैं. सोहा की ये कमबैक फिल्म है, ऐसे में फिल्म से उम्मीदें भी ज्यादा हैं.
साल 2021 में आई फिल्म ‘Chhorii’ में नुसरत का काम बेहतरीन था, अब फिल्म का पार्ट-2 आ रहा है और इसके लेकर काफी चर्चा है. लेकिन जहां नुसरत की तारीफ हो रही है, वहीं एक दिक्कत भी है. इस फिल्म की तुलना स्त्री 2 से की जा रही है. कहा जा रहा है कि दोनों फिल्मों में काफी सिमिलैरिटी हैं, इसलिए छोरी का कम्पैरिजन स्त्री से किया जा रहा है. लेकिन इसमें कई दिक्कतें हैं. ये बात काफी बेतुकी है. हम ऐसा क्यों कह रहे हैं, आइए जानते हैं.
मैडॉक ने बहुत ऊंचा ट्रेंड सेट कर दिया है
दिन-ब-दिन ओटीटी का चलन बढ़ता जा रहा है. चार-पांच सालों के वक्त में ओटीटी ने थिएटर को टक्कर देने वाला कंटेंट बनाना शुरू कर दिया है और ऐसे में लोग अब थिएटर से ज्यादा घर पर आराम से बैठकर ओटीटी पर फिल्में देखना पसंद करते हैं. बीते सालों में हॉरर में बहुत कुछ आया है और वर्ल्ड सिनेमा देख पाने के कारण लोग अब कुछ नया देखना पसंद करते हैं, और बॉलीवुड से उम्मीद भी यही लगाई जाती है. हॉरर में मैडॉक ने बहुत ऊंचा ट्रेंड सेट कर दिया है. ऐसे में साल 2021 में एक नई फिल्म आती है ‘छोरी’, जिसमें लीड एक्ट्रेस नुसरत भारूचा हैं. अब अगर इसकी तुलना आप एक फ्रेंचाइज फिल्म से करें तो ये गलत बात है, क्योंकि ‘स्त्री’ ना सिर्फ एक काफी बड़े बजट और एक्टर्स की फिल्म है, बल्कि इसकी पॉपुलैरिटी भी बहुत ज्यादा है.
सबसे बड़ा फर्क जो दोनों फिल्मों के कम्पैरिजन को बेतुका साबित करता है वो इसकी टोन में ही है. स्त्री एक हॉरर कॉमेडी है, जहां स्त्री के पहले पार्ट में हॉरर ज्यादा और कॉमेडी कम थी, वहीं पार्ट 2 में हॉरर का काम कम और कॉमेडी का ज्यादा है. ज्यादा गैग्स है जो पिछले फिल्म का नोस्टाल्जिया यूज करके अपने कैरेक्टर्स को आपस में जोड़ती है, वहीं दूसरी तरफ छोरी एक सीरियस हॉरर फिल्म है. इसमें कोई कॉमेडी नहीं है. इसकी कहानी आपको एक ऐसे वर्ल्ड में ले जाती है जहां जान बचाना ही मेन काम है.
‘स्त्री’ 2 VS ‘छोरी’ 2 की बहस
नुसरत की फिल्म ‘छोरी’ और ‘स्त्री’ दोनों देखने में काफी सिमिलर लगती हैं ये बात सच है. दोनों ही फोर्कलोर स्टोरी हैं, दोनों में लीड एक फीमेल है, दोनों के नाम लगभग एक जैसे हैं, दोनों में किसी ना किसी तरह से समाज को आएना दिखाने वाली कहानी है. ऐसे में इन्हें कम्पैयर करना आसान हो जाता है, लेकिन समझने वाली बात ये है कि स्त्री की कहानी कभी एक फिल्म तक सीमित थी ही नहीं. इस कहानी में शुरू से ही कई सवाल छोड़े जाते हैं जो पार्ट 2 को एक बढ़िया बिल्डअप देते हैं, जबकि छोरी के फर्स्ट पार्ट की स्टोरी उसी में खत्म हो जाती है. इसके दूसरे पार्ट में बिल्कुल नए किरदार हैं, और नई कहानी है.
इसके अलावा छोरी में नुसरत का किरदार अच्छा लिखा गया है, लेकिन इस किरदार में श्रद्धा के किरदार की तरह डेप्थ नहीं है. श्रद्धा के किरदार का नाम भले ही राज हो, लेकिन मेकर्स यही खेल जाते हैं, क्योंकि शुरू से इस किरदार के बारे में एक मिस्ट्री है और ऐसे में हम उसके किरदार से जुड़ते चले जाते हैं. वो किरदार कहां से आता है, कहां तक जाता है, आप अपने आप श्रद्धा के किरदार के बारे में सोचने लगते हैं कि आखिर ये है कौन? उसके ऊपर से मैडॉक ने स्त्री के साथ एक पूरा का पूरा यूनिवर्स खड़ा कर दिया है, ऐसे में ये बात भी तय है कि स्त्री की कहानी केवल इन्हीं फिल्मों तक सीमित नहीं है. जबकि छोरी किसी यूनिवर्स का हिस्सा नहीं है. ये एक स्टैंडअलोन कहानी है.
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