• Sat. Apr 5th, 2025

क्या है थाईलैंड पहुंचने का वो रूट जो समय-खर्च दोनों बचाएगा? जानें भारत-मिडिल ईस्ट से जुड़कर कैसे बदलेगा गेम

ByCreator

Apr 4, 2025    150813 views     Online Now 217
क्या है थाईलैंड पहुंचने का वो रूट जो समय-खर्च दोनों बचाएगा? जानें भारत-मिडिल ईस्ट से जुड़कर कैसे बदलेगा गेम

नए समुद्री रास्‍ते में बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर से होते हुए थाइलैंड का रैनोंग प्रवेश द्वार बनेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दो दिवसीय थाईलैंड दौरे पर गुरुवार (03 अप्रैल) को बैंकॉक पहुंच चुके हैं. वहां उन्होंने थाईलैंड की प्रधानमंत्री शिनावात्रा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और रात्रिभोज में शामिल हुए. थाईलैंड एक ऐसा गेम चेंजर रूट बना रहा है, जिससे भारत और मिडिल ईस्ट के देश जुड़ेंगे. आइए जान लेते हैं कि क्या है पूरा प्लान?

थाईलैंड एक ऐसे समुद्री रूट पर काम कर रहा है जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) को धता बताते हुए (बाईपास कर) हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच जहाजों के आवागमन में लगने वाले समय में अच्छी-खासी कमी ला देगा.

यात्रा में 4 दिन की कमी, घटेगा 15 फीसदी खर्च

थाईलैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सैन फ्रांसिस्को में निवेशकों के साथ चर्चा के दौरान साल 2023 के आखिर में इसकी घोषणा की थी. उन्होंने बताया था कि इस महत्वाकाक्षी परियोजना से यात्रा के समय में औसतन चार दिनों की कमी आएगी और शिपिंग का खर्च 15 फीसदी तक घट जाएगा. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2030 तक मलक्का जलडमरूमध्य की क्षमता पार हो जाएगा. ऐसे में दावा किया गया है कि नया रूट सामान की आसान पहुंच सुनिश्चित करेगा.

28 बिलियन अमेरिकी डॉलर के खर्च का अनुमान

इस नए जलमार्ग परियोजना की अनुमानित लागत करीब 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर बताई गई है. इसमें थाईलैंड के दक्षिणी प्रायद्वीप के दोनों किनारों पर बंदरगाहों का निर्माण भी शामिल है, जो पहले से ही बेहतरीन हाईवे और रेल नेटवर्क से जुड़े हुए हैं. इस नए प्रस्तावित 100 किमी के कनेक्टिंग रूट के जरिए थाईलैंड की ओर से Kra Isthmus होकर पहले प्रस्तावित नहर बनाने की योजना पर विराम लग जाएगा.

See also  23 जुलाई महाकाल आरती दर्शन: भगवान महाकाल का बिलपत्र त्रिपुण्ड चंद्र धारण कर दिव्य श्रृंगार

इसलिए की गई नए रूट की तलाश

मलेशिया और सिंगापुर के मध्य मलक्का जलडमरूमध्य एक संकरा समुद्री मार्ग है जो वर्तमान में हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों को भारत और मध्य पूर्व से जोड़ता है. दुनियाभर के कुल सामान का करीब एक चौथाई इसी समुद्री मार्ग से आता-जाता है. इसके कारण यह एक महत्वपूर्ण लेकिन संकरा समुद्री कॉरिडोर बनता जा रहा है. इस मार्ग पर शिपिंग की लागत ज्यादा आती है और दिन दुर्घटनाएं भी होती हैं. ऐसे में नया रूट सस्ता, तेज और सुरक्षित होगा.

मलक्का जलडमरूमध्य को ऐसे करेंगे बाईपास

थाईलैंड की इस परियोजना को लैंडब्रिज प्रोजेक्ट या क्रा लैंडब्रिज के रूप में जाना जाता है. इसके तहत थाईलैंड का रानोंग इसका मुख्य प्रवेश द्वार बनेगा. मलक्का जलडमरूमध्य को बाईपास करने के लिए 100 किमी लंबे रेल और राजमार्ग का इस्तेमाल किया जाएगा. यह अंडमान सागर और थाईलैंड के बीच सेतु का काम करेगा. पूर्वी और पश्चिमी छोर पर प्रस्तावित बंदरगाहों की क्षमता 19.4 और 13.8 मिलियन टन एक्विवैलेंट यूनिट की होगी. यह मलक्का पोर्ट के कुल कार्गो का करीब 23 फीसदी होगा. इस पहल से थाईलैंड में करीब तीन लाख रोजगार भी पैदा होंगे.

India Thailand New Sea Route Explained

मलेशिया और सिंगापुर के मध्य मलक्का जलडमरूमध्य एक संकरा समुद्री मार्ग है, यहां सी-ट्रैफिक बढ़ता है. यह भी नए मार्ग बनाने की एक वजह है.

साल 2030 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य

लैंडब्रिज प्रोजेक्ट दक्षिणी थाईलैंड में रानोंग (अंडमान सागर) से लेकर थाईलैंड की खाड़ी में चुम्फॉन के बीच प्रस्तावित है. थाईलैंड का लक्ष्य इस परियोजना को साल 2030 तक पूरा करना है. इस परियोजना के तहत बंदरगाहों और अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में विदेशी निवेशकों को स्थानीय कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर के तहत 50 फीसदी से भी ज्यादा की हिस्सेदारी की छूट दी गई है.

See also  Ind Vs Sa 3rd T20 : साउथ अफ्रीका ने इंडिया को 49 रनों से हराया, सीरीज पर भारत का कब्जा

भारत के लिए इस तरह से होगा फायदेमंद

थाईलैंड का लैंडब्रिज प्रोजेक्ट भारत के ट्रेड रूट से जुड़ी चिंता का एक प्रमुख समाधान बनकर सामने आएगा. भारत का ज्यादातर समुद्री व्यापार मलक्का जलडमरूमध्य के जरिए होता है. इसके संकरा होने के कारण सामान आने-जाने में काफी विलंब होता है, जिससे इसकी लागत भी बढ़ जाती है. ऐसे में भारत को लैंडब्रिज प्रोजेक्ट के जरिए एक वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा. इससे भारत को अपने आयात-निर्यात में आसानी होगी.

कम खर्च से आर्थिक साझेदारी बढ़ेगी

लैंडब्रिज के जरिए आवागमन में कम समय लगने और शिपिंग खर्च कम होने के कारण भारत और एशिया-पैसिफिक रीजन में आर्थिक गठबंधन बढ़ेंगे. भारत अपनी आर्थिक साझेधारी और व्यापार को बढ़ाने के लिए कम खर्चीले वैकल्पिक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करेगा जो इसके लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा.

पहले भी उठा था विचार

मलक्का जलडमरूमध्य को बाईपास करने पर आज से नहीं, 17वीं शताब्दी से ही विचार किया जा रहा है. तब पहली बार मिस्र की स्वेज नहर की तरह एक नहर बनाने का प्रस्ताव रखा गया था. हालांकि, इसकी लागत ज्यादा होने और देश के दो हिस्सों में बंट जाने के डर के कारण इस योजना को रोक दिया गया था. इसके बाद साल 2018 में अंडमान सागर और थाईलैंड की खाड़ी को जोड़ने वाले रेल और राजमार्ग के रूप में नया लैंडब्रिज प्रोजेक्ट सामने आया. थाईलैंड की सरकार ने इस परियोजना को एक नए विशेष आर्थिक क्षेत्र, दक्षिणी आर्थिक गलियारे के सेंटर के रूप में स्थापित किया है.

यह भी पढ़ें: क्या है BIMSTEC, भारत को कितना फायदा? समिट के लिए बैंकॉक पहुंचे PM

See also  Odisha News : किराए के मकान में मिली महिला की लाश, शरीर पर चोट के निशान, जांच में जुटी पुलिस

[ Achchhikhar.in Join Whatsapp Channal –
https://www.whatsapp.com/channel/0029VaB80fC8Pgs8CkpRmN3X

Join Telegram – https://t.me/smartrservices
Join Algo Trading – https://smart-algo.in/login
Join Stock Market Trading – https://onstock.in/login
Join Social marketing campaigns – https://www.startmarket.in/login

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x
NEWS VIRAL