पश्चिम बंगाल के मालदा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां टीएमसी नेता पर आरोप है कि वह बांग्लादेशी हैं. इतना ही नहीं, वो विदेशी नागरिक होने का नाटक करते हुए बंगाल आई और फर्जी ओबीसी कार्ड बनवाया. हालांकि, हाल ही में उनका यह प्रमाण पत्र रद्द हो गया लेकिन उनका पंचायत प्रधान का पद बरकरार रहा था, लेकिन लवली खातून उसे बचा नहीं पाईं.
इस सुंदर महिला पर आरोप था कि वह बांग्लादेश से आकर तृणमूल के टिकट पर पंचायत चुनाव जीतकर मुखिया का पद संभाल रही है. लवली खातून से पंचायत प्रधान का चुनाव हारने वाली रेहाना सुल्ताना ने उन पर आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद उनकी सच्चाई सबके सामने आ गई.
लवली खातून को प्रधान पद से हटाया
जानकारी के मुताबिक, भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते लवली खातून को मालदा के रशीदाबाद पंचायत प्रधान के पद से हटा दिया गया है. डीएम के आदेश के बाद उनकी पंचायत सदस्यता भी रद्द कर दी गई. फिलहाल, डीएम के निर्देशानुसार उप-प्रमुख उस पंचायत की जिम्मेदारी संभालेंगे.
बांग्लादेशी होने का लगा था आरोप
लवली खातून ने 2023 का पंचायत चुनाव तृणमूल के टिकट पर ओबीसी आरक्षित सीट पर लड़ा था. तब से उनकी प्रतिद्वंद्वी रेहाना सुल्ताना उनके खिलाफ बांग्लादेशी होने का आरोप मुखरता से उठाती रही हैं. चुनाव जीतने के बाद पंचायत प्रधान बनने के बावजूद रेहाना सुल्ताना लवली खातून की असली पहचान उजागर करने पर अड़ी रही. बीडीओ के पास भी गईं. वहां, पहली गलती लवली के पहचान पत्र में पाई गई. लेकिन जब इससे कोई खास मदद नहीं मिली तो रेहाना ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.
2015 से पहले आई थी भारत
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद लवली खातून को पंचायत प्रधान के बद से हटा दिया गया है. हटाई गई इस पंचायत प्रधान का असली नाम नसिया शेख है. कथित तौर पर वह 2015 से पहले भारत आई थीं. लवली ने तुरंत फर्जी वोटर कार्ड बना लिया. उन्होंने अपने पिता का नाम भी बदल दिया. लेकिन हजारों प्रयासों के बावजूद अंत में उनकी सच्चाई सामने आ ही गई.
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